हल्द्वानी के गांवों में शहर से दोगुना पेयजल संकट बेहतर की जा रही है।

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हल्द्वानी के ग्रामीण क्षेत्र पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। शहरी उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने से गौला नदी का पानी गांवों तक नहीं पहुंच रहा है। ट्यूबवेल भी खराब हो रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी से स्थिति और बिगड़ने की संभावना है।

हल्द्वानी। हल्द्वानी शहर के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्र दोगुना पेयजल संकट झेल रहे हैं। शहरी उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ने से गौला नदी का पानी गांवों तक पहुंचना बंद हो गया है। वहीं, लगातार खराब होने से ट्यूबवेल आधारित पेयजल सप्लाई भी फेल हो रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र शहर से ज्यादा पेयजल संकट झेलने को मजबूर हो रहे हैं। हल्द्वानी के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरत के अनुसार पांच दशक पहले फिल्टर प्लांट बनाकर गौला नदी से पानी की आपूर्ति शुरू की गई थी। लगातार हुए शहरीकरण से अब शहरी उपभोक्ताओं की संख्या 63,693 पहुंच गई है। इससे पानी की मांग बढ़ने पर गौला का पानी शहर में ही खत्म हो जा रहा है।

ऐसे में 10,618 ग्रामीण उपभोक्ताओं की ट्यूबवेल से मिलने वाले पानी पर निर्भरता बनी हुई है। गर्मी का असर शुरू होते ही ट्यूबवेल लगातार खराब हो रहे हैं। एक माह में ही ग्रामीण क्षेत्रों में 14 ट्यूबवेल खराब हो चुके हैं, जिनमें से अभी तक पांच ठीक नहीं किए जा सके हैं। इससे ग्रामीण पीने के पानी के लिए भी तरस रहे हैं। लगातार पड़ रही गर्मी और पानी की बढ़ती मांग से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।टैंकर से भी नहीं पहुंच रहा पानीशहरी क्षेत्र में जल संस्थान पानी की कमी से प्रभावित इलाकों में विभागीय और अनुबंधित टैंकरों से पानी पहुंचाता है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की कमी से जूझ रहे लोगों को टैंकर से पानी मिलना भी मुश्किल बना रहता है। ऐसे में पानी के इंतजाम के लिए निजी टैंकर मंगाना मजबूरी बन जाता है।जानवरों को पिला रहे नहर का पानीग्रामीणों को परिवार के साथ अपने मवेशियों के लिए भी पानी का इंतजाम करना पड़ता है, जिससे उनकी पानी की मांग अधिक रहती है। पानी की कमी के चलते गांव से गुजरने वाली नहर और गूल का पानी मवेशियों को पिलाया जा रहा है। इसके दूषित होने से पशुओं के बीमार होने की आशंका बनी हुई है।कोट :उपभोक्ताओं की संख्या ज्यादा होने पर गांव तक गौला का पानी नहीं पहुंचता है। ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था लगातार बेहतर की जा रही है।रविशंकर लोशाली, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान

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