हल्द्वानी के बदहाल स्कूलों में बच्चों की जान जोखिम में, शिक्षा विभाग पर सवाल – haldwani unrecognized schools fake tcs safety risks exposed

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Updated: Wed, 22 Apr 2026 02:51 PM (IST)

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों की पोल खुली है, जहां बच्चों की जान जोखिम में डालकर शिक्षा दी जा रही थी। …और पढ़ें

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सुमित जोशी, हल्द्वानी । बनभूलपुरा में खंडहरनुमा भवन की छत के नीचे लंबे समय से बगैर मान्यता के निजी स्कूल चलते रहे। शिक्षा के कारोबारियों ने बच्चों की जान को जोखिम में डालकर खुलेआम विद्यालय चलाए। यहां नर्सरी से कक्षा पांच तक पढ़ने के बाद बच्चों ने आगे की पढ़ाई के लिए शहर के दूसरे स्कूलों में भी प्रवेश लिया। लेकिन, शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नगर पहले फर्जीवाड़े पर नहीं पड़ी। हालांकि, पिछले वर्ष खंड शिक्षा अधिकारी तारा सिंह के मान्यताओं के मामले का संज्ञान लेने के बाद शहर के कई स्कूलों पर सख्ती की गई।

इसमें न्यू एरा स्कूल और शाइनिंग स्टार पब्लिक स्कूल के स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) सत्यापित नहीं किए गए। मगर, सवाल उससे पहले के अधिकारियों पर उठते हैं। क्योंकि अब शिक्षा विभाग ने जांच में खुद मान रहा है कि दोनों स्कूल मानकों में ही फेल हैं और बच्चों की जान खतरे में डालकर संचालित हो रहे थे।

ऐसे में मान्यता खत्म होने के बाद यहां की टीसी कैसे और किसने पास की गईं? जिम्मेदारों ने रिकार्ड पर ध्यान क्यों नहीं दिया? बनभूलपुरा के दो स्कूलों का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद शिक्षा का पूरा सिस्टम कटघरे में आ गया है। वहीं, खंडहरनुमा भवन में स्कूल संचालित होने पर प्रशासनिक तंत्र भी सवाल खड़े होते हैं।

दीवारें के करीब से गुजर रहे हैं हाईटेंशन लाइन

आजादनगर क्षेत्र में बगैर मान्यता संचालित हो रहे न्यू एरा स्कूल और शाइनिंग स्टार पब्लिक स्कूल की दीवारें बाहर से ही बदहाली को बयां कर रही हैं। कई जगह से प्लास्तर भी उखड़ चुका है। सबसे बड़ा खतरा तो करंट का है। क्योंकि, स्कूल की दीवारों के करीब से ही हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। साथ ही बिजली के खंभे पर तारों का गुच्छा में खतरे को दर्शाता है। ऐसे में करंट लगने का खतरा बना रहता है। वहीं, स्कूल के नीचे बेकरी संचालित होती है।

न्यू एरा का सोसाइटी पंजीकरण तक नहीं

शिक्षा विभाग की ओर से जारी नोटिस में न्यू एरा स्कूल का सोसाइटी पंजीकरण न होने की बात लिखी गई है। इस स्कूल के बोर्ड पर 1978 से संचालित होने की बात दर्ज है। 48 वर्ष से संचालित स्कूल पर कई सवाल खड़े होते हैं। वहीं, शाइनिंग स्टार प्रबंधन की ओर से आरटीई मान्यता के लिए आनलाइन आवेदन किए जाने की बात लिखी गई है।

दोनों का एक शौचालय, छात्र-छात्राओं के लिए अलग नहीं

बनभूलपुरा में बगैर मान्यता संचालित दोनों स्कूलों शौचालयों को लेकर खामी भी पकड़ी गई है। शिक्षा विभाग के नोटिस के अनुसार दोनों में एक ही शौचालय की व्यवस्था है। साथ ही छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय नहीं है।

शिक्षक भी प्रशिक्षित नहीं, संसाधनों पर भी सवाल

दोनों स्कूलों में शिक्षक और शिक्षिकाओं के प्रशिक्षित नहीं होने की बात भी जांच में सामने आई है। साथ ही बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रयोग होने वाले ब्लैक बोर्ड आकार में छोटा होने की बात भी कही गई है।

स्कूलों की मान्यता पर प्रशासन ने भी उठाए हैं सवाल

हल्द्वानी में प्रशासन और शिक्षा विभाग की टीम ने बीते पांच अप्रैल को किताबों की दुकानों का निरीक्षण किया था। यहां कुछ स्कूलों की जानकारी मिलने पर मान्यता पर भी सवाल उठाए थे। ऐसे में प्रशासनिक रिपोर्ट में भी जांच के निर्देश दिए गए थे। इस मुख्य शिक्षा अधिकारी ने जांच भी कराई थी।

बनभूलपुरा के आजादनगर क्षेत्र के दोनों निजी स्कूलों की टीसी सत्यापन पर पहले ही रोक लगा दी गई थी। साथ ही जांच कराने के बाद संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की गई है। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं होगा।– तारा सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी

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