जागरण संवाददाता, हल्द्वानी । जिला प्रशासन के निर्देश अनुसार बनभूलपुरा क्षेत्र में छह टीमें डोर टू डोर पहुंच कर भौतिक सत्यापन कर रही हैं। यह कार्य पीएम आवास योजना का लाभ देने के लिए हो रहा है।
इस दौरान आवेदनकर्ताओं के घर पहुंचने पर यह बात सामने आई है कि उनका अपना घर दूसरे राज्यों में भी है। यह बात फार्म जमा करने के दौरान छुपाई गई थी।
ऐसे में पीएम आवास योजना के मानक अनुसार यह आवेदन निरस्त हो सकते हैं। हालांकि सर्वे पूरा होने के बाद ही प्रशासनिक कमेटी इसका निर्णय लेगी। बनभूलपुरा बनाम रेलवे अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर प्रभावितों के पुनर्वास के लिए पीएम आवास योजना का लाभ दिया जाना है।
सात हजार प्रभावितों के फार्म जमा
इसके लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने बनभूलपुरा में 20 मार्च से एक अप्रैल तक कैंप लगाकर करीब सात हजार प्रभावितों के फार्म जमा किए हैं।
अब जमा फार्मों की जांच, स्क्रूटनी करने के बाद इन्हें सुप्रीम कोर्ट भेजा जाना है। इसको लेकर जिला प्रशासन ने विभिन्न विभागों के कर्मियों को मिलाकर छह टीम बनाई है, जो क्षेत्र में आवेदनों का भौतिक सत्यापन कर रही हैं।
गुरुवार को जागरण की टीम ने मौके पर सर्वे का जायजा लिया। इसमें टीमें प्रत्येक आवेदक के घर पहुंचकर उनसे विभिन्न सवाल कर रही थी। इस दौरान कई घरों में जब टीमों ने लोगों के कही दूसरी जगह आवास होने की बात पूछी, तो करीब चार से घरों में पता लगा कि उनका दूसरे राज्य जैसे उत्तरप्रदेश, दिल्ली आदि में दूसरा घर बना है।
वहीं यह लोग प्रवासी के तौर पर यहां किराए पर रहे हैं, जो पीएम आवास योजना के मानक पर खरे नहीं उतरे हैं। इन आवेदनों को दोबारा प्रशासन अपने स्तर से जांच करेगा। जिसमें संभावना है कि यह निरस्त हो सकते हैं।
पीएम आवास योजना के मानक में स्पष्ट है कि लाभ लेने वाले का कही दूसरी जगह आवास नहीं होना चाहिए। यदि सत्यापन में ऐसे लोग मिल रहे हैं, तो फील्ड कर्मी उनकी टिप्पणी तैयार कर जिला प्रशासन की कमेटी को देगा। इसके बाद निर्णय अनुसार निर्धारित कार्रवाई की जाएगी। – पारितोष वर्मा, नगर आयुक्त
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