भदयूनी में मातम: बीमार पिता की ‘सांस’ था कमल, जंगली जानवर ने छीना बुढ़ापे का इकलौता सहारा

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भदयूनी में मातम: बीमार पिता की ‘सांस’ था कमल, जंगली जानवर ने छीना बुढ़ापे का इकलौता सहारा

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भदयूनी में एक दुखद घटना में, 32 वर्षीय कमल की मौत एक जंगली जानवर के हमले से हुई। कमल अपने बीमार पिता के लिए दवाई लाने गया था, लेकिन शादी समारोह से लौटते समय उसकी लाश गदेरे में मिली। उसके पिता इंदर सिंह की हालत गंभीर है और उनका एकमात्र सहारा अब चला गया।

भदयूनी में मातम: बीमार पिता की 'सांस' था कमल, जंगली जानवर ने छीना बुढ़ापे का इकलौता सहारा

भदयूनी में मातम: बीमार पिता की ‘सांस’ था कमल, जंगली जानवर ने छीना बुढ़ापे का इकलौता सहारा – बुढ़ापे की लाठी टूटा: बीमार पिता के लिए दवा लाने वाला हाथ सदा के लिए शांत- उम्मीदों का कत्ल: घर का चूल्हा जलाने वाले इकलौते सहारे को निगल गया हिंसक जानवरमोहम्मद खालिद खां। हल्द्वानीपहाड़ की पथरीली राहों पर जब किसी बुजुर्ग की लाठी टूटती है, तो दर्द की गूँज पूरे गांव में सुनाई देती है। भदयूनी गांव में आज ऐसा ही मंजर है। जिस बेटे ने परसों ही अपने बीमार पिता की उखड़ती सांसों को थामने के लिए हल्द्वानी से दवा लाकर दी थी, आज उसी बेटे का शव गदेरे में मिलने से कोहराम मच गया है।शादी

से लौटा, पर घर नहीं पहुँचा:32 वर्षीय कमल गुरुवार को एक शादी समारोह से लौट रहा था, लेकिन वह घर नहीं पहुँचा। शुक्रवार को गदेरे में उसका क्षत-विक्षत शव मिलने से सनसनी फैल गई। प्राथमिक दृष्टि में किसी हिंसक जंगली जानवर या बाघ के हमले की बात सामने आ रही है।- बीमार पिता का हाथ और पैर था कमलकमल का जाना केवल एक मृत्यु नहीं, बल्कि एक हँसते-खेलते परिवार की रीढ़ का टूटना है। बुजुर्ग पिता इंदर सिंह सांस की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उनकी स्थिति ऐसी है कि दो कदम चलने पर भी सांस उखड़ने लगती है। परसों ही कमल उन्हें हल्द्वानी के बड़े डॉक्टर को दिखाकर लाया था और दवाइयाँ दिलाई थीं। परिवार की पूरी जिम्मेदारी कमल के ही कंधों पर थी, चाहे वह घर का खाना बनाना हो, खेती की देखरेख या गांव की पेयजल लाइन की सप्लाई खोलना। बड़ा भाई शादी के बाद अलग रहता है, ऐसे में कमल ही अपने लाचार पिता की एकमात्र उम्मीद था।- अब हमारा क्या होगा, मेरा बेटा ला दो…बेटे की मौत की खबर ने बुजुर्ग इंदर सिंह को भीतर तक तोड़ दिया है। अपनी उखड़ती सांसों के बीच वे बस एक ही रट लगाए हैं, मेरा कमल ला दो… अब हमारा क्या होगा, वही तो मेरा सहारा था। पिता की यह चित्कार सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आँखें नम हो गईं। पूरा भदयूनी गांव इस अनहोनी से स्तब्ध है।फोटो::

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