कपकोट (बागेश्वर)। ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। शामा और जगथाना जैसे कुछ चुनिंदा मार्गों को छोड़कर अधिकांश ग्रामीण सड़कों पर बसों का संचालन ठप है, जिसके कारण ग्रामीणों को आवाजाही के लिए पूरी तरह निजी टैक्सियों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
सबसे अधिक संकट बागेश्वर-सौंग-मुनार रूट पर देखा जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार कोरोना काल से पहले इस मार्ग पर केमू की बस का नियमित संचालन होता था, जिससे दर्जनों गांवों के लोगों को सस्ती और सुलभ परिवहन सुविधा मिलती थी।
वर्तमान में केवल हल्द्वानी-शामा और हल्द्वानी-जगथाना बसें ही संचालित हो रही हैं, जो पूरे क्षेत्र की आबादी के लिए नाकाफी हैं।
रिखाड़ी के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य दिनेश टाकुली और राजू टाकुली ने बताया कि मुनार तक बस सेवा बंद होने से हरसिला, असों, पोलिंग, कपकोट, भराड़ी, दुलम, सौंग, मुनार, रिखाड़ी और सूपी जैसे दुर्गम गांवों के लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
कोविड के बाद कुछ समय के लिए बस सेवा बहाल की गई थी, लेकिन बाद में इसे स्थायी रूप से बंद कर दिया गया। अब इन गांवों के बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

