उत्तराखंड के बहुचर्चित बनभूलपुरा बनाम रेलवे भूमि विवाद मामले में आज यानी 28 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई है। हजारों प्रभावित परिवारों की नजरें आज अदालत पर टिकी थीं, जिन्हें अब अगली तारीख का इंतजार करना होगा। हालांकि, इस बीच एक ब
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याचिकाकर्ताओं ने अपनी बात रखी
हम न्याय की उम्मीद में लगातार कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं। सरकार की योजनाओं और जमीनी हकीकत दोनों को ध्यान में रखकर फैसला होना चाहिए, ताकि किसी भी परिवार के साथ अन्याय न हो। यह सिर्फ जमीन का विवाद नहीं है, बल्कि हजारों लोगों के घर और उनके बच्चों के भविष्य का सवाल है। सरकार और न्यायालय दोनों को संवेदनशीलता के साथ कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
रेलवे का दावा है कि हल्द्वानी रेलवे स्टेशन से लगे बनभूलपुरा में उसकी 29 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है, जबकि स्थानीय निवासी दशकों से वहां रहने और वैध दस्तावेज होने की बात कह रहे हैं। इससे पहले नैनीताल हाईकोर्ट ने बुलडोजर चलाने का आदेश दिया था। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि “50,000 लोगों को रातों-रात बेघर नहीं किया जा सकता। जहां सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में मानवीय पहलू पर जोर देते हुए प्रभावितों के पुनर्वास की संभावना तलाशने को कहा था। इसके बाद जिला विधिक प्राधिकरण और नैनीताल जिला प्रशासन ने 20 मार्च से 4 अप्रैल तक बनभूलपुरा में 6 कैंप लगाकर प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवेदन लिया गए थे जहां करीब 7000 लोगों ने पीएम आवास योजना के लिए आवेदन किए हैं जहां आवेदक को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया है।

