एक किताब, एक जैसे चैप्टर, फिर दाम अलग-अलग क्यों?
उत्तराखंड के स्कूलों के अभिभावक शिक्षा विभाग की किताबों की महंगाई से परेशान हैं। एनसीईआरटी की किताबों की तुलना में प्रदेश की किताबें 35 से 45 प्रतिशत महंगी हैं। शिक्षा महानिदेशक ने इस मामले की जांच का आश्वासन दिया है। अभिभावक एक समान मूल्य की मांग कर रहे हैं।

प्रमोद डालाकोटी हल्द्वानी। उत्तराखंड के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावक शिक्षा विभाग के दोहरे रवैये और सिस्टम की खामियों से परेशान हैं। एक तरफ सरकार मुफ्त और सस्ती शिक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग की ओर प्रकाशित किताबें जो एनसीईआरटी की तरह हैं। उनको महंगे दाम में बेचा जा रहा है।पड़ताल: पेज और कंटेंट समान, दाम में अंतरमंगलवार को ‘हिन्दुस्तान’ ने बाजार में किताबों के दाम, पेज संख्या और चैप्टर को लेकर पड़ताल की। इस दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इस दौरान दोनों किताबों के दामों में भारी अंतर देखा गया।
कक्षा एक की अंग्रेजी की किताब ‘मृदंग’ की बात करें तो एनसीईआरटी की किताब मात्र 65 रुपये की है जिसमें 119 पेज हैं। वहीं उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग की 119 पेज वाली ‘मृदंग’ की कीमत 99.80 रुपये तय की गई है। अभिभावक गौरव पंत ने कहा कि एक तरफ सरकार मुफ्त शिक्षा और सस्ती किताबों का दावा करती है वहीं दूसरी ओर एक ही कंटेंट के लिए हमसे ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं। ये बेहद गलत है। किताबों के रेट समान होने चाहिए। आपके प्रिय समाचार पत्र हिन्दुस्तान ने मंगलवार को उत्तराखंड की किताबें एनसीईआरटी से 80 फीसदी तक महंगी खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।मूल्य तुलना: एक नजर मेंकक्षा विषय पृष्ठ संख्या एनसीईआरटी मूल्य उत्तराखंड अंतरकक्षा1 मृदंग 119 65 99.80 34.80कक्षा 6 सारंगी 114 65 99.80 34.80कक्षा 6 विज्ञान 252 65.00 117.92 52.92ये है तर्कशिक्षा विभाग के बड़े अफसरों का तर्क है की छपाई के टेंडर, कागज की गुणवत्ता या वितरण प्रणाली में अंतर के कारण दाम कम बाकी हो सकते हैं। अफसरों ने कहा कि एनसीईआरटी ने जब किताब छापने में असमर्थता जताई तब उत्तराखंड सरकार ने किताब प्रकाशित की। यह टेंडर प्रक्रिया के तहत प्रकाशित की जाती है। इसकी रायल्टी भी दी जाती है। कागज भी खरीदा जाता है। इसलिए एनसीईआरटी से दाम पुस्तक के अधिक हैं।विकल्प के नाम पर ‘महंगी’ शिक्षापिछले कुछ वर्षों से उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग एनसीईआरटी के विकल्प के रूप में अपनी किताबें बाजार में उतार रहा है। कहने को तो यह व्यवस्था किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए की गई थी, लेकिन दामों में लगभग 35 से 45 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी ने अभिभावकों को परेशान कर दिया है।::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::किताबों के दामों में अंतर पर शिक्षा महानिदेशक ने कहा जांच करेंगेहल्द्वानी,वरिष्ठ संवाददाता। उत्तराखंड में एनसीईआरटी और शिक्षा विभाग की ओर से प्रकाशित पुस्तकों के मूल्यों में विसंगति का मामला अब शासन तक पहुंच गया है। आपके प्रिय समाचार पत्र ‘हिन्दुस्तान’ की ओर से मामले में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद मंगलवार को शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह ने कहा की इस प्रकरण की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्य शिक्षा अधिकारी नैनीताल और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद एससीईआरटी की निदेशक से मामले में रिपोर्ट मांगी जाएगी। विभाग यह पता लगाएगा कि प्रिंटिंग, पेपर की गुणवत्ता या किन कारणों से किताबों की कीमत एनसीईआरटी से अधिक तय की गई है।


