Farming Tips: ऑर्गेनिक खेती में कमाल करेगा वर्मी कंपोस्ट, 45 दिन में होगा तैयार! जानें तरीका

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जैविक खेती किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है.रासायनिक उर्वरकों के लगातार उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घट रही है और साथ ही फसलों की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है. इसी समस्या के समाधान के लिए कृषि विशेषज्ञ लगातार किसानों को प्राकृतिक विकल्प अपनाने की सलाह दे रहे हैं. वर्मी कंपोस्ट ऐसी ही प्राकृतिक विधि है, जो मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारती है और फसलों की पैदावार बढ़ाने में मदद करती है. 

वर्मी कंपोस्ट क्या है?
वर्मी कंपोस्ट केंचुओं की मदद से बनाया गया जैविक खाद है. केंचुए जैविक कचरे (गोबर, पत्तियां, सब्जी के छिलके) को खाकर उसे काली, भुरभुरी और पोषक तत्वों से भरपूर खाद में बदल देते हैं. इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्व प्राकृतिक रूप से होते हैं. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसलों में बीमारियां कम होती हैं.

वर्मी कंपोस्ट का उपयोग करने से न सिर्फ मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, बल्कि फसल की वृद्धि और स्वास्थ्य भी बेहतर होता है. बाजार में जैविक खेती की लगातार बढ़ रही मांग की वजह से फसलों की बेहतर कीमत भी मिल सकती है. आइए जानते हैं वर्मी कंपोस्ट बनाने का प्रोसेस क्या है?

सही जगह चुनें
छायादार, समतल और हवादार जगह लें जहां सीधी धूप न पड़े. तापमान 20-30 डिग्री सेल्सियस रहे. घर में छत, बालकनी या खेत में गोदाम के पास ठीक रहेगी. ज्यादा गर्मी या ठंड से केंचुए प्रभावित होते हैं.

बेड या गड्ढा तैयार करें
10 फीट लंबा, 3-4 फीट चौड़ा और 1.5-2 फीट गहरा बेड बनाएं. ईंटों, सीमेंट या HDPE प्लास्टिक शीट से क्यारी बनाएं. बाजार में तैयार वर्मी बैग भी इस्तेमाल कर सकते हैं. नीचे 2-3 इंच बालू या रेत बिछाएं ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके.

अच्छी नस्ल के केंचुए लें
Eisenia fetida (रेड विगलर) सबसे अच्छी प्रजाति है. 1 वर्ग मीटर बेड के लिए 1-1.5 किलो (1000-1500 केंचुए) काफी हैं. इन्हें कृषि केंद्र या ऑनलाइन खरीदें.

बेस परत डालें
सबसे नीचे 3-4 इंच सूखी पत्तियां, भूसा, फसल अवशेष या कागज के टुकड़े बिछाएं. यह केंचुओं के लिए आरामदायक बिस्तर बनाता है.

कच्चा माल भरें
ताजा गोबर (गाय/भैंस) को 15-20 दिन पहले पानी में भिगोकर आंशिक सड़ाएं. फिर 6-8 इंच परत डालें. ऊपर सब्जी-फल के छिलके, घास, पत्तियां, खरपतवार आदि मिलाएं. ध्यान रहे कि मांस, दूध, तेल या प्लास्टिक वाली चीजें न डालें.

नमी का ध्यान रखें
बेड को हमेशा नम रखें. हफ्ते में 2-3 बार पानी छिड़कें. ध्यान रखें ज्यादा पानी से केंचुए मर सकते हैं.

केंचुए डालें और ढक दें
सामग्री 15-20 दिन सड़ने के बाद केंचुए डालें. ऊपर सूखी घास या बोरी ढक दें ताकि अंधेरा और नमी बनी रहे.

देखभाल और पलटाई
हर 7-10 दिन में ऊपरी परत हल्के हाथों से पलटें.अगर सूखा लगे तो पानी डालें. कीड़े लगने पर नीम का पानी स्प्रे करें.

तैयार होने का समय और पहचान
45-60 दिनों में खाद काला, भुरभुरा और बिना किसी बदबू के मिट्टी जैसा तैयार हो जाता है. केंचुए ऊपर आ जाते हैं. तैयार खाद को छलनी से छान लें. केंचुओं को वापस बेड में डाल दें. यह खाद 2-5 क्विंटल प्रति एकड़ फसलों में डाल सकते हैं.

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