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Good news: Big victory in the fight against cancer, world's first skin cancer vaccine will reduce the risk of death.
By: Amar Ujala
Published: 23 October 2026
Photo / Illustration: Haldwani Times News Desk
<p>स्किन कैंसर का खतरा - फोटो : Adobe Stock मेलेनोमा कैंसर के शिकार लोगों के लिए राहत मेलेनोमा, स्किन कैंसर के सबसे खतरनाक प्रकारों में से एक है। इससे जूझ रहे मरीजों के लिए जल्द ही एक नई वैक्सीन उम्मीद की किरण बन सकती है। इस वैक्सीन को हर मरीज के कैंसर के हिसाब से अलग-अलग तैयार किया जाता है। बड़े स्तर पर किए गए क्लिनिकल ट्रायल में इसके उत्साहजनक नतीजे सामने आए हैं। अध्ययन के मुताबिक, इस वैक्सीन को इम्यूनोथेरेपी के साथ देने पर कैंसर के दोबारा लौटने या शरीर के दूसरे अंगों तक फैलने का खतरा 50% तक कम देखा गया।</p>
<p>जब कैंसर पास की लिम्फ नोड्स या फेफड़ों, लिवर और दिमाग जैसे दूर के अंगों तक फैल जाता है, तो इससे मरीजों के लिए स्थिति और गंभीर हो जाती है। ऐसे मामलों में केवल 40 प्रतिशत मरीज ही पांच साल तक जीवित रह पाते हैं। इस तरह के खतरे को कम करने के लिए विशेषज्ञों ने नई वैक्सीन के बारे में जानकारी दी है।</p>
<p>स्किन कैंसर की नई वैक्सीन - फोटो : Adobe Stock इंटिस्मेरान वैक्सीन के बारे में जानिए इंटिस्मेरान नाम की इस वैक्सीन पर काम कर रहे शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके नतीजे कैंसर के इलाज के एक नए दौर की शुरुआत कर सकते हैं।</p>
<p>कैंसर रिसर्च यूके की रिसर्च डायरेक्टर डॉ. कैथरीन इलियट ने इन नतीजों को उत्साहजनक बताया। वह कहती हैं, इससे सर्जरी के बाद मरीजों में दोबारा कैंसर होने की टेंशन को खत्म किया जा सकता है। हर व्यक्ति का कैंसर दूसरे लोगों से अलग हो सकता है। इसलिए मरीज की जरूरत के मुताबिक इलाज तैयार करने पर शोध करना बेहद जरूरी है।</p>
<p>वैक्सीन के दिखे अच्छे परिणाम - फोटो : Adobe stock कैसे किया गया वैक्सीन का ट्रायल? इस अध्ययन के नतीजे यूरोपियन सोसाइटी फॉर मेडिकल ऑन्कोलॉजी के कैंसर सम्मेलन में पेश किए जाने हैं। इस ट्रायल में कुल 1,137 मरीज शामिल हुए। इन सभी का कैंसर सर्जरी के जरिए निकाल दिया गया था, लेकिन डॉक्टरों को आशंका थी कि भविष्य में बीमारी दोबारा लौट सकती है। सभी मरीजों को एक साल तक पेम्ब्रोलिजुमैबनाम की इम्यूनोथेरेपी दवा दी गई। इम्यूनोथेरेपी ऐसा इलाज है, जो शरीर के इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन पर हमला करने में मदद करता है। गौरतलब है कि मेलेनोमा के इलाज में इम्यूनोथेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका है। हालांकि, यह हर मरीज पर समान रूप से असर नहीं करती। कुछ मामलों में कैंसर कोशिकाएं इलाज के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लेती हैं। वे दवा के असर से बचने लगती हैं और इलाज का प्रभाव कम हो सकता है। इसी वजह से शोधकर्ता इम्यूनोथेरेपी के साथ कैंसर वैक्सीन देने की संभावना तलाश रहे हैं।</p>
<p>कैंसर का खतरा - फोटो : Adobe Stock Photos मरीज के कैंसर के हिसाब से कैसे तैयार होती है वैक्सीन? इंटिस्मेरान की सबसे खास बात यह है कि इसे हर मरीज के ट्यूमर की आनुवंशिक जानकारी के आधार पर तैयार किया जाता है।</p>
<p>इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च, लंदन के प्रोफेसर एलन मेल्चर ने कहा कि फिलहाल मेलेनोमा के इलाज में इस तरह की वैक्सीन आगे बढ़ती दिखाई दे रही है, लेकिन दूसरे कैंसर में भी इसकी संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। हम किडनी, ब्लैडर (मूत्राशय) और फेफड़ों का कैंसर पर भी इसी तरह से काम करने की कोशिशों में हैं। हालांकि, अभी यह समझना जरूरी है कि किस प्रकार के कैंसर में यह तरीका सबसे ज्यादा फायदेमंद होगा, किन मरीजों को इससे अधिक लाभ मिल सकता है और कैंसर कोशिकाओं के किन आनुवंशिक संकेतों को निशाना बनाना सबसे प्रभावी रहेगा? -------------- स्रोत: Moderna cancer vaccine stops melanoma returning: what’s next for personalized treatments? अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।</p>