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RBI Bulletin: Economy strong, banks reduced loan rates and strong growth in NBFCs, know what is special
By: Amar Ujala
Published: 23 October 2026
Photo / Illustration: Haldwani Times News Desk
<p>भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को अपना मासिक 'आरबीआई बुलेटिन-अक्तूबर 2026' जारी किया है। वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में गहराते तनाव और आपूर्ति शृंखला की बाधाओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूती का प्रदर्शन कर रही है। बुलेटिन में शामिल विस्तृत अध्ययनों के अनुसार, मौद्रिक नीति में की गई कटौती का लाभ अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) के माध्यम से कर्जदारों तक तेजी से पहुंचा है। इसके साथ ही, परिसंपत्ति गुणवत्ता में निरंतर सुधार के दम पर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने दोहरे अंकों में क्रेडिट ग्रोथ दर्ज की है।</p>
<p>बुलेटिन के 'स्टेट ऑफ द इकोनॉमी' अध्ययन के अनुसार, पश्चिम एशिया में नए भू-राजनीतिक तनावों और आपूर्ति शृंखला में आए व्यवधानों ने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ाया है, जिसके चलते प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने नीतिगत दरें बढ़ाई हैं। इसके बावजूद, उद्योग और सेवा क्षेत्र के उच्च-आवृत्ति संकेतकों के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है।</p>
<p>आरबीआई बुलेटिन में प्रकाशित शोध अध्ययन 'ट्रांसमिशन टू लेंडिंग रेट्स ऑफ एससीबी: प्राइस वर्सेस कंपोजिशन इफेक्ट्स इन डब्ल्यूएएलआर' में वाणिज्यिक बैंकों की नई कर्ज दरों का गहन विश्लेषण किया गया है। अध्ययन के मुख्य डेटा-आधारित निष्कर्ष:</p>
<p>बुलेटिन के तीसरे अध्ययन में दिसंबर 2025 के अंत तक एनबीएफसी क्षेत्र के प्रदर्शन का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:</p>
<p>अध्ययन 'नाउकास्टिंग स्टेट-लेवल इकोनॉमिक एक्टिविटी इन इंडिया विद नाइट-टाइम लाइट एंड गूगल ट्रेंड्स' में राज्यों की आर्थिक गतिविधि (जीएसवीए) को मापने का एक अनूठा डिजिटल मॉडल प्रस्तुत किया गया है। आधिकारिक आंकड़े सालाना देरी से जारी होते हैं, इसलिए महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात के लिए उपग्रह-आधारित नाइट-टाइम लाइट्स और गूगल ट्रेंड्स के डिजिटल सर्च व्यवहार को मिलाकर एक नया मॉडल तैयार किया गया है। यह तकनीक वास्तविक समय में क्षेत्रीय आर्थिक बदलावों का तुरंत आकलन करने में मदद करती है। आरबीआई का अक्टूबर 2026 बुलेटिन यह स्पष्ट करता है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की समष्टि आर्थिक स्थिति काफी मजबूत बनी हुई है। बैंकों द्वारा कर्ज दरों में कटौती का कुशल हस्तांतरण, एनबीएफसी का सुदृढ़ प्रदर्शन और नए डिजिटल डेटा मॉडल्स का उपयोग देश के वित्तीय और प्रशासनिक ढांचे को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बना रहा है।</p>