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Home Ministry: Special broadband network will be built for police and soldiers, 30 lakh personnel across the country will get the facility.
By: Amar Ujala
Published: 24 October 2026
Photo / Illustration: Haldwani Times News Desk
<p>देश में पुलिस, अर्धसैनिक बलों और आपदा राहत से जुड़े कर्मियों के बीच संचार व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय करीब 30 लाख कर्मियों के लिए देशव्यापी समर्पित ब्रॉडबैंड नेटवर्क विकसित करना चाहता है। इसके जरिए जरूरत के समय सुरक्षित और तेज संचार के साथ आवाज, वीडियो और डेटा साझा करने की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।</p>
<p>गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को इस प्रस्तावित नेटवर्क के डिजाइन और तकनीकी ढांचे को लेकर आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे। इस पहल का उद्देश्य पुलिस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को ऐसा संचार तंत्र उपलब्ध कराना है, जो गंभीर परिस्थितियों में भी उनके काम आ सके।</p>
<p>गृह मंत्रालय के प्रस्तावित नेटवर्क का नाम ब्रॉडबैंड पब्लिक प्रोटेक्शन एंड डिजास्टर रिलीफ (BB-PPDR) है। यह देशभर में सार्वजनिक सुरक्षा और आपदा राहत से जुड़े विभागों के लिए तैयार किया जाएगा।</p>
<p>इस नेटवर्क के तहत मिशन क्रिटिकल पुश-टू-टॉक (MCPTT), मिशन क्रिटिकल डेटा और मिशन क्रिटिकल वीडियो जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इससे संबंधित कर्मियों को तत्काल आवाज संदेश भेजने, जरूरी डेटा साझा करने और वीडियो के जरिए स्थिति की जानकारी देने में मदद मिल सकती है।</p>
<p>इस व्यवस्था के दायरे में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), अग्निशमन सेवाएं, चिकित्सा सेवाएं और अन्य सार्वजनिक सुरक्षा एजेंसियां आएंगी।</p>
<p>गृह मंत्रालय ने कहा है कि प्रस्तावित नेटवर्क का रेफरेंस आर्किटेक्चर तैयार करने के लिए जनता और संबंधित पक्षों की राय मांगी जा रही है। मंत्रालय अलग-अलग डिजाइन विकल्पों और संभावित तकनीकों का आकलन करना चाहता है।</p>
<p>सुझावों में तकनीकों के फायदे और नुकसान, लागत की दक्षता तथा भारतीय परिस्थितियों में उनकी उपयुक्तता जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है। मंत्रालय का उद्देश्य ऐसा नेटवर्क तैयार करना है, जो देश की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़ी जरूरतों को पूरा कर सके।</p>
<p>प्रस्तावित परियोजना के लिए गृह मंत्रालय ने 10 पायलट स्थान चुने हैं। इनमें अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p>इन स्थानों का चयन परियोजना के शुरुआती परीक्षण और नेटवर्क की उपयोगिता को परखने के लिहाज से किया गया है। हालांकि, बयान में परीक्षण की विस्तृत समयसीमा नहीं बताई गई है।</p>
<p>गृह मंत्रालय के मुताबिक, इस परियोजना के लिए करीब 30 लाख हैंडसेट की जरूरत का अनुमान है। इन्हें कर्मियों की जिम्मेदारियों और कार्यस्थल की आवश्यकताओं के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की योजना है।</p>
<p>मंत्रालय के अनुसार, फील्ड में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को कठिन परिस्थितियों में काम करने के अनुकूल बनाया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों के लिए स्मार्टफोन श्रेणी के उपकरण और अन्य जरूरतों के लिए स्थिर या वाहन में लगाए जाने वाले उपकरण प्रस्तावित हैं। बॉडी-वॉर्न कैमरों यानी शरीर पर लगाए जाने वाले कैमरों की संख्या अभी तय नहीं की गई है।</p>
<p>इस परियोजना के लिए गृह मंत्रालय को 814-824 मेगाहर्ट्ज और 859-869 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम का सैद्धांतिक आवंटन मिला है। ये फ्रीक्वेंसी सामान्य मोबाइल ब्रॉडबैंड के प्रचलित बैंड से अलग हैं।</p>
<p>मंत्रालय ने इन फ्रीक्वेंसी पर काम करने वाले रेडियो उपकरणों और व्यावसायिक रूप से उपलब्ध डिवाइस की जानकारी भी मांगी है। इससे नेटवर्क के लिए जरूरी तकनीक की उपलब्धता और उसकी व्यावहारिक उपयोगिता का आकलन किया जा सकेगा।</p>
<p>फिलहाल यह परियोजना नेटवर्क की संरचना, तकनीक और उपकरणों की जरूरत तय करने के चरण में है। आगे की प्रक्रिया में मिले सुझावों और तकनीकी आकलन की अहम भूमिका होगी।</p>