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Manipur: '14 people killed in 10 days', why did so much violence increase suddenly?
By: BBC Hindi
Published: 24 October 2026
Photo / Illustration: Haldwani Times News Desk
<p>मणिपुर के इंफाल ईस्ट ज़िले में स्थित उयुम्पोक गाँव में 32 साल के क्षेत्रिमयुम सुशील के घर पर मातम छाया हुआ है.</p>
<p>19 अक्तूबर को इंफाल घाटी में चरमपंथियों के एक कथित हमले में जिन तीन मैतेई लोगों की मौत हो गई थी, उनमें सुशील एक थे.</p>
<p>सुशील पर यह हमला उस वक़्त हुआ, जब वह गाँव के कुछ लोगों के साथ पास के जंगल में लकड़ियाँ लाने गए थे.</p>
<p>इस घटना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ओकरम इबोबी सिंह समेत कई लोग सुशील के घर संवेदना व्यक्त करने पहुँच रहे हैं. बाहर से आने वाले लोगों को देखते ही सुशील के बुज़ुर्ग पिता फूट-फूट कर रोने लगते है.</p>
<p>आँखों में आँसू लिए सुशील के पिता के देबेन कहते है, "उन हत्यारों ने मेरे घर का सहारा छीन लिया. मेरा बेटा जंगल में लकड़ियाँ लाने ही तो गया था. लेकिन वो घर नहीं लौटा. उसकी चार साल की बेटी अक्सर पूछती है कि पिता कहाँ हैं, मैं बच्ची को क्या जवाब दूँ?"</p>
<p>अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित के देबेन ने कहा," पहाड़ी इलाक़ों की तलहटी में रहने वाले लोगों के लिए आजीविका कमाने का एकमात्र ज़रिया लकड़ी इकट्ठा करना और धान के खेतों में काम करना है. अगर उस दौरान कोई गोली मार देगा तो लोग घरों से बाहर ही नहीं निकल पाएँगे. सबके मन में डर बैठ गया है, ऐसे हालात में हम जीवित कैसे रहेंगे?"</p>
<p>मणिपुर के पहाड़ी इलाक़ों में चल रही हिंसा अचानक और तेज़ हो गई है. इस महीने अर्थात 9 अक्तूबर से महज 10 दिनों के भीतर कम से कम 14 लोगों की हत्या कर दी गई.</p>
<p>बीते 9 और 10 अक्तूबर के दरमियान कामजोंग, कांगपोकपी और उखरुल ज़िले में 12 घंटे की हिंसा में 9 लोगों की जान गई थी. इन हमलों में कुकी और नगा लोग मारे गए थे.</p>
<p>इसके बाद 17 अक्तूबर को कामजोंग ज़िले के कुकी बहुल चस्साद गाँव में एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई.</p>
<p>18 अक्तूबर की रात थौबल ज़िले के खंगाबोक में एक और व्यक्ति मारा गया. फिर 19 अक्तूबर को इंफाल ईस्ट ज़िले में तीन मैतई लोगों की हत्या कर दी गई</p>
<p>तीन मई 2023 से मैतेई समुदाय और कुकी जनजाति के बीच लगातार जारी हिंसा में इस साल काफ़ी कमी देखने को मिली थी.</p>
<p>लेकिन फिर बीते फ़रवरी महीने में उखरुल ज़िले में कुकी और नगा जनजाति के कुछ युवकों के बीच कथित तौर पर शराब के नशे में हुई हाथापाई व्यापक हिंसा में बदल गई.</p>
<p>महज 8 महीने पहले शुरू हुए नागा-कुकी संघर्ष में अबतक कम से कम 22 नगा और 31 कुकी नागरिक मारे जा चुके हैं.</p>
<p>परंतु तीन दिन पहले मैतेई लोगों पर हुए हमले के बाद प्रदेश में जारी हिंसा का एक नया दौर देखने को मिला है.</p>
<p>अर्थात पहले जातीय हिंसा दो समुदायों के बीच थी लेकिन अब यह त्रिकोणीय संघर्ष में बदल गई है. एक तरफ मैतेई और कुकी लड़ रहें है और दूसरी तरफ नगा समुदाय कुकी जनजाति से टकरा रहा हैं.</p>
<p>देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.</p>
<p>मणिपुर पुलिस ने नोंगशुम में मैतेई लोगों पर हुए हमले की घटना में तीन संदिग्धों को पकड़ा है.</p>
<p>पुलिस ने बताया कि इंफाल ईस्ट-कांगपोकपी ज़िले की सीमा पर स्थित नोंगशुम पहाड़ी के पास के जंगल में 19 अक्टूबर की सुबह लगभग 14 मैतेई लोग जलाऊ लकड़ी इकट्ठा कर रहे थे.</p>
<p>तभी उन पर संदिग्ध चरमपंथियों ने गोलीबारी कर दी. इस घटना में तीन लोगों की गोली लगने से मौत हो गई और चार अन्य घायल हुए हैं.</p>
<p>सगोलमांग पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने इस हमले में मारे गए लोगों की शिनाख़्त 32 साल के क्षेत्रिमयुम सुशील, अरुबम रोनिल (35) और लैरेनलाकपम इनाओबी (44) के तौर पर की है.</p>
<p>इस बीच मणिपुर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक लहरी दोरजी लहातू ने एक प्रेस कॉफ्रेंस कर बताया, "मणिपुर पुलिस, भारतीय सेना, असम राइफल्स और सीआरपीएफ कोबरा की एक संयुक्त टीम ने घटना स्थल के आसपास तलाशी अभियान चलाकर लकड़हारों की हत्या के मामले में तीन लोगों को पकड़ा है."</p>
<p>पुलिस अधिकारी लहातू ने कहा, "गिरफ्तार किए गए लोगों में से दो ने स्वीकार किया है कि वे उस हमलावर दल का हिस्सा थे. सुरक्षा अधिकारियों ने इलाक़े में ऑपरेशन के दौरान 12 अत्याधुनिक हथियार (जिनमें इंसास राइफलें, एके-47, एम-16, स्नाइपर राइफलें और टाइप 81 राइफलें समेत हैंड ग्रेनेड, पॉम्पी बम और एक हज़ार से ज़्यादा ज़िंदा कारतूस के साथ विस्फोटक बरामद किए गए हैं."</p>
<p>पुलिस अधिकारी ने राज्य में जारी हिंसा से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा कि मणिपुर के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी ज़रूरी उपाय किए जा रहे हैं.</p>
<p>इस साल सात अप्रैल के बाद यह पहली घटना है, जब घाटी में रहने वाले मैतेई लोगों पर हमला किया गया है. इस हमले के बाद से मैतेई बहुल इंफाल घाटी के लोगों में भारी नाराजग़ी देखने को मिल रही है.</p>
<p>आक्रोशित स्थानीय लोगों ने हत्याओं का विरोध करते हुए पीड़ितों के शवों को इंफाल स्थित मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के सरकारी आवास के सामने रख दिया था, जिन्हें बाद में सुरक्षाकर्मियों ने हटाया.</p>
<p>फ़िलहाल तीनों शवो को इंफाल स्थित एक सरकारी अस्पताल के मुर्दा घर में रखा गया है. पीड़ित परिवारों ने इंसाफ़ नहीं मिलने तक और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करने तक शवों को लेने से इनकार कर दिया है.</p>
<p>मैतेई समुदाय से जुड़े नेटिव पीपल्स कमिटी मणिपुर ने इन हत्याओं के ख़िलाफ़ बीते मगंलवार को 48 घंटे का बंद बुलाया था, जिसका असर घाटी के सभी ज़िलों में देखने को मिला.</p>
<p>इस बंद की मियाद बुधवार शाम 5 बजे ख़त्म हो गई थी लेकिन गुरुवार को भी इंफाल में बाज़ार-दुकाने बंद रहे. इंफाल में मैतेई नागरिक समाज के समूह और 'मीरा पैबी' आज भी धरने पर बैठे हुए हैं.</p>
<p>मैतेई लोगों की हत्या से नाराज इंफाल के रहने वाले किरन कहते है, "पिछले छह महीनों से घाटी में शांति थी लेकिन कुकी उग्रवादियों ने हमारे निर्दोष लोगों की हत्या कर माहौल को वापस तनावपूर्ण बना दिया."</p>
<p>राज्य में जारी हिंसा से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए किरन ने कहा, "सरकार के कुछ लोग बोल रहे थे कि अब स्थिति में सुधार हुआ है और मुक्त आवाजाही की जा सकती है. इस भरोसे के बाद ही हमारे लोग लकड़ियाँ लेने पास के जंगल में गए थे और उनकी हत्या कर दी गई. अब इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है? "</p>
<p>मणिपुर में जारी हिंसा में अचानक आई तेज़ी के पीछे संदिग्ध चरमपंथियों की संलिप्त्ता को प्रमुख कारण माना जा रहा है.</p>
<p>कुकी जनजाति के प्रमुख नागरिक संगठन कुकी इनपि अपने बयानों में पहाड़ी ज़िलों में हो रहे हमले और आगज़नी के पीछ नगा चरमपंथी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालैंड यानी एनएससीएन (आईएम) पर आरोप लगाते है.</p>
<p>जबकि मणिपुर में नगा जनजातियों का सर्वोच्च सामाजिक और राजनीतिक संगठन यूनाइटेड नागा काउंसिल 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' में चल रहे विभिन्न सशस्त्र कुकी समूहों को इन हमलों का दोषी बताता है.</p>
<p>मणिपुर में लगातार बढ़ती हिंसा की घटनाओं पर बात करते हुए भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल हिमालय सिंह ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "राज्य में क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल मौजूद हैं, फिर भी हिंसा हो रही है.''</p>
<p>''ऐसा लगता है कि सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय के ज़रिए चलाए जाने वाले संयुक्त अभियानों में कुछ कमी है. सख्त कार्रवाई न होने से हिंसा भड़काने वालों के हौसले और बुलंद हो गए हैं."</p>
<p>मणिपुर के स्थायी निवासी लेफ्टिनेंट जनरल हिमालय सिंह का मानना है कि हिंसा के लगातार बढ़ने के पीछे बाहरी ताक़तों का भी हाथ है.</p>
<p>उन्होंने कहा, "हिंसा की घटनाएँ बढ़ने के पीछे कुछ बाहरी ताक़तें है जो यहाँ शांति कायम नहीं होने देना चाहतीं. मणिपुर की सीमा म्यांमार से लगती है और हाल ही में जारी हिंसा के संदर्भ में सीमा पार सक्रिय कुछ चरमपंथी समूहों के नाम सामने आए हैं. असल में मणिपुर इस समय भू-राजनीति का अखाड़ा बन गया है. जातीय हिंसा की एक और वजह धर्म और क़बीलेवाद से जुड़ी हुई है. कुछ लोग ऐसे विभाजनकारी मुद्दों को हवा देकर समस्या को और गंभीर बना रहे हैं."</p>
<p>मणिपुर में लंबे समय से मानवाधिकार के लिए काम कर रहे के ओनिल का मानना है कि कुकी-जो जनजाति जिन माँगों पर अड़ी है, उस पर सरकार की तवज्जो नहीं मिलना इस हिंसा की एक वजह हो सकती है.</p>
<p>मानवाधिकार कार्यकर्ता ओनिल ने हिंसा में अचानक आई तेज़ी पर कहा, "यह लड़ाई ज़मीन की है. अगर राज्य में शांति बहाल हो जाती है, तो कुकी समुदाय की ओर से अलग प्रशासन और केंद्र शासित प्रदेश की जो माँगे है वो किनारे की जा सकती हैं.''</p>
<p>''भारत सरकार के साथ संघर्ष विराम में जो चरमपंथी समूह है, उन पर ही हिंसा भड़काने के आरोप हैं. हिंसा इसलिए बढ़ी है क्योंकि ये सशस्त्र समूहों संघर्ष विराम के नियमों का पालन नहीं कर रहे."</p>
<p>मणिपुर में 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' समूहों की हिंसा में संलिप्तता के बारे में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सिंह का भी यही मानना है. पूर्व सैन्य अधिकारी ने कहा,"हिंसा की जितनी भी घटनाएँ सामने आ रही है उसमें चरमपंथी समूहों पर आरोप लग रहें है. इसका मतलब बिलकुल साफ है कि ये चरमपंथी संघर्ष विराम के सभी बुनियादी नियमों को तोड़ रहें है."</p>
<p>मणिपुर सरकार हिंसा को रोकने के लिए के लिए सैन्य कार्रवाई से ज़्यादा जातीय समूहों में बातचीत को अहम बताती है.</p>
<p>राज्य के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "शांति केवल बातचीत से आती है, बंदूक की नली से नहीं. किसी भी तरह के मतभेदों को केवल बातचीत और चर्चा के ज़रिए ही सुलझाया जा सकता है."</p>
<p>उन्होंने कहा,"सरकार हिंसा में उलझे लोगों में आपसी समझ बनाने का प्रयास कर रही है. एक बड़ा तबका इस बात को समझता है कि हमें शांति कायम करने के लिए बातचीत करनी होगी. केवल सुरक्षा बलों के भरोसे समस्याओं का समाधन नहीं किया जा सकता."</p>
<p>हिंसा को अंजाम दे रहे चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा, "हिंसा फैलाने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जा रही है. कई स्तर पर चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान में अपराधियों को पकड़ा है और उनसे भारी मात्रा मे हथियार, गोला बारूद्ध बरामद किया है."</p>
<p>गृह विभाग के एक और अधिकारी ने बताया, "जिन पहाड़ी ज़िलों में हिंसा हुई है, वहाँ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा गया है. कामजोंग ज़िले में बढ़ती हिंसा को नियंत्रण करने के लिए डीजीपी मुकेश सिंह खुद गए हैं. उन्होंने वहाँ के कुकी-नगा लोगों की चिंताओं को सुना है. इसके बाद 11 असम राइफल्स और बीएसएफ के प्रतिनिधियों के साथ भी एक संयुक्त सुरक्षा समन्वय बैठक की है. सरकार शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है."</p>
<p>बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.</p>
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