उत्तराखंड में बाजार में बिक रहीं स्कूलों में मुफ्त बंटने वाली किताबें, जांच की मांग – ncert books scam free school books sold in market haldwani

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उत्तराखंड में बाजार में बिक रहीं स्कूलों में मुफ्त बंटने वाली किताबें, जांच की मांग

Updated: Fri, 10 Apr 2026 10:21 AM (IST)

इंस्पिरेशन स्कूल के प्रबंधक दीपक बल्यूटिया ने मुफ्त वितरण वाली एनसीईआरटी किताबों के बाजार में महंगे दाम पर बेचे जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे कर …और पढ़ें

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हल्द्वानी में पत्रकारों से वार्ता करते दीपक बल्यूटिया। जागरण 

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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी । इंस्पिरेशन स्कूल के प्रबंधक दीपक बल्यूटिया ने शिक्षा विभाग की ओर से एनसीईआरटी की किताबों को छपवाकर बाजार में बेचने पर सवाल उठाए हैं। इसे लेकर उन्होंने गुरुवार को विद्यालय में प्रेसवार्ता की। जिसमें कहा कि एनसीईआरटी से सरकारी स्कूलों में निश्शुल्क वितरण के लिए किताबें राज्य में ही छपाने की अनुमति है।

इसके अलावा राजकीय मान्यता प्राप्त स्कूलों के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत तक अतिरिक्त पुस्तकें छपवाकर बाजार में उपलब्ध कराई जा सकती हैं। ताकि, उन बच्चों को भी सस्ती किताबें मिल सकें। लेकिन, एनसीईआरटी से ज्यादा दामों पर किताबें छपवाकर अभिभावकों को चूना लगाया जा रहा है। साथ ही इतनी अधिक संख्या में किताबें छप रही हैं कि अब सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के बच्चे भी उन्हें खरीद रहे हैं।

 अधिक दामों पर किताबें बेचने पर सवाल

उन्होंने अधिक दामों पर किताबें बेचने पर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही इसे व्यक्ति विशेष को फायदा पहुंचने के लिए ऐसा किए जाने के आरोप लगाए हैं। इसमें करोड़ के घपले की आशंका भी जताई है। सरकार से मामले की जांच कराते हुए जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

साथ ही शिक्षा विभाग की ओर से जारी नोटिस और आरोपों को आधारहीन बताया है। साथ ही इसका कोई प्रमाण प्राप्त नहीं होने की बात कही है। उनका दावा है कि स्कूल की वेबसाइट पर सत्र शुरू होने से पहले ही फीस संरचना और किताबों की सूची जारी कर दी गई थी।

इधर, कहा कि स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों को अनिवार्य करने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगाया हुआ है। ऐसे में विद्यालयों पर इन्हीं पुस्तकों से पढ़ाने का दबाव नहीं डाला जा सकता है। लेकिन, ऐसा किया जा रहा है तो कोर्ट की अवमानना है। हालांकि, विद्यालय प्रबंधन ऐसा नहीं करते हैं। बच्चों के समग्र विकास के साथ ही अभिभावकों की आर्थिक स्थिति का भी ध्यान रखा जाता है।

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