नई तकनीक के उपचार से नवजात मृत्यु दर में आएगी कमी
देवेंद्र रौतेला हल्द्वानी में डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में नवजातों के उपचार के लिए पॉइंट ऑफ केयर अल्ट्रासाउंड (पोकस) कार्यशाला आयोजित की गई। विशेषज्ञों ने इस तकनीक की उपयोगिता और नवजात शिशुओं के त्वरित निदान पर चर्चा की। 42 चिकित्सकों ने कार्यशाला में भाग लिया।

देवेंद्र रौतेला हल्द्वानी। डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में पॉइंट ऑफ केयर अल्ट्रासाउंड (पोकस) कार्यशाला में नवजातों के उपचार पर चर्चा हुई। नवजात के इलाज में नई तकनीक के उपयोग पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने पोकस तकनीक की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी।डॉ. प्रदीप सूर्यवंशी (पुणे), डॉ. गायत्री मुराजकर (मुंबई), डॉ. हंस वैष (देहरादून) और डॉ. चिन्मय चेतन (विभागाध्यक्ष, जॉली ग्रांट मेडिकल कॉलेज, देहरादून) ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। मेडिकल कॉलेज में बाल रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. ऋतु रखोलिया ने बताया कि फंक्शनल अल्ट्रासाउंड के माध्यम से नवजात शिशुओं के दिमाग, छाती, फेफड़े, हृदय और पेट की बीमारियों का त्वरित निदान संभव है।
यह तकनीक बिना किसी विकिरण के शिशुओं के बिस्तर पर ही जांच और उपचार की सुविधा प्रदान करती है, जो गंभीर रूप से बीमार नवजातों के लिए अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों और बड़े शहरों में यह तकनीक प्रभावी साबित हो रही है। भविष्य में उत्तराखंड में भी इसके माध्यम से नवजात मृत्यु दर में कमी लाई जा सकेगी। कार्यशाला में प्रदेश भर से आए 42 चिकित्सकों ने भाग लिया। इस दौरान उद्घाटन चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. अजय आर्या, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जी.एस. तितियाल, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण जोशी, डॉ. अनिल, डॉ. रवि, डॉ. गुंजन मौजूद रहे।


