हल्द्वानी आईएसबीटी का सपना नौ साल के बाद साकार होने को तैयार
हल्द्वानी का बहुप्रतीक्षित अंतरराज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) परियोजना अब धरातल पर उतरने के लिए तैयार है। शासन के निर्देश पर गठित समिति ने संभावित स्थलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट भेज दी है। गौलापार में भूमि चयन की संभावनाएं अधिक हैं और अंतिम निर्णय 25 अप्रैल तक लिया जाएगा।

बृजेंद्र मेहता हल्द्वानी। करीब नौ वर्षों से अटकी हल्द्वानी की बहुप्रतीक्षित अंतरराज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) परियोजना अब धरातल पर उतरने को पूरी तरह तैयार है। शासन के निर्देश पर गठित तीन अफसरों की कमेटी ने बीते दिनों दोनों संभावित स्थलों का स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट परिवहन मुख्यालय भेज दी है। कमेटी अध्यक्ष ने 25 अप्रैल तक भूमि पर अंतिम निर्णय होने का दावा किया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार गौलापार में भूमि फाइनल होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में आधुनिक इंटरस्टेट बस टर्मिनल का सपना वर्ष 2015-16 से अधूरा है। पहले गौलापार में प्रस्तावित यह परियोजना 2017 में तीनपानी शिफ्ट कर दी गई, जिसके बाद यह वन स्वीकृति, भूमि विवाद और कानूनी प्रक्रियाओं में उलझती रही।बीते
दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के बाद गौलापार और तीनपानी के बीच लंबित विवाद सुलझने के संकेत मिल रहे हैं। इसके बाद शासन स्तपर आनन-फानन से उपपरिवहन आयुक्त सुनील शर्मा की अध्यक्षता में गठित कमेटी सदस्य आरटीओ हल्द्वानी डॉ. गुरदेव सिंह और परिवहन निगम की आरएम पूजा जोशी दोनों स्थलों का सघन निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट परिवहन मुख्यालय को भेज दी है।“कमेटी सदस्यों की तरफ से दोनों स्थलों के निरीक्षण की आख्या प्राप्त हो चुकी है। एक-दो दिन में मुख्यालय स्तर पर बैठक कर इस रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा।25 अप्रैल से इनमें से एक भूमि चयनित कर शासन को सूचित कर दिया जाएगा। सरकार का पूरा प्रयास है कि हल्द्वानी की आईएसबीटी परियोजना जल्द धरातल पर उतरे।”— सुनील शर्मा, उप परिवहन आयुक्त, देहरादूनगौलापार में आईएसबीटी में संभावनाएं अधिक :जमीन पहले से चिन्हित, प्रारंभिक कार्य हो चुका पूराफोर लेन बाइपास से बेहतर कनेक्टिविटी और चौड़ीकरण संभवककम कानूनी बाधाएं, तेजी से निर्माण संभवबाहरी यातायात शहर में प्रवेश किए बिना डायवर्ट किया जा सकता है।हल्द्वानी बस अड्डे, रेलवे स्टेशन और अस्पताल से दूरी करीब तीन से साढ़े तीन किमी है।तीनपानी आईएसबीटी की संभावनाएं कुछ कमटीपीनगर-तीनपानी बाइपास पर आबादी के बीच।टीपीनगर, मंडी, यूओयू समेत आसपास घनी आबादी से जाम की आशंकानहर चौड़ीकरण और सड़क विस्तार की जरूरतवन भूमि स्वीकृति में देरी की संभावनाहल्द्वानी बस और रेलवे अड्डे से दूरी करीब पांच किमी है।आईएसबीटी परियोजना: प्रमुख तथ्य- गौलापार में 8 हेक्टेयर भूमि पर प्रारंभिक प्रस्ताव, 2015-16 में 11 करोड़ से अधिक खर्च, करीब 2600 पेड़ों की कटाई के बाद भी काम रुका।- 2017 में तीनपानी शिफ्ट, वन भूमि होने से स्वीकृति अटकी- लागत 75 करोड़ से बढ़कर कहीं अधिक होने का अनुमान- हाईकोर्ट में जनहित याचिका से भी प्रक्रिया प्रभावित- देरी के चलते काठगोदाम में ‘हिल डिपो’ की वैकल्पिक योजना


