बोले हल्द्वानी: तहसील में आने वाले लोगों के लिए बैठने तक की सुविधा नहीं

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बोले हल्द्वानी: तहसील में आने वाले लोगों के लिए बैठने तक की सुविधा नहीं

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– पूर्व में कुमाऊं आयुक्त के दौरे के दौरान भी कई अनियमितताएं सामने आई थीं,

बोले हल्द्वानी: तहसील में आने वाले लोगों के लिए बैठने तक की सुविधा नहीं

हल्द्वानी, भूपेश कन्नौजिया। हल्द्वानी शहर के बीचों-बीच स्थित जिले की एक ऐतिहासिक तहसील की स्थापना 1899 में हुई थी। इसके अंतर्गत वर्तमान में 200 से अधिक गांव आते हैं। इस तहसील में तहसीलदार, पटवारी और अन्य राजस्व अधिकारी बैठते हैं, जो भूमि संबंधी कार्यों के साथ-साथ आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जारी करते हैं। बावजूद इतने वर्षों बाद भी यहां आने वाले लोगों को बदइंतजामी के बीच घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। तहसील परिसर में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को धूप और बारिश में खड़े रहने को मजबूर होना पड़ता है। महिलाओं के लिए शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है।

सुरक्षा व्यवस्था भी कमजोर है, जिससे चोरी और जेबकतरी की घटनाएं सामने आ रही हैं। बढ़ती भीड़ के बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार न होने से लोगों में भारी नाराजगी है। हैरानी की बात यह है कि तहसील परिसर से कुछ ही दूरी पर कई वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय स्थित हैं, इसके बावजूद यहां की बदहाल स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।तहसील परिसर में रोजाना बड़ी संख्या में लोग विभिन्न कार्यों के लिए पहुंचते हैं, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। नामांतरण, खतौनी की नकल, आय-जाति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी कार्यों के लिए लोगों को लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है। बैठने की समुचित व्यवस्था न होने से बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं। महिलाओं के लिए अलग शौचालय की सुविधा नहीं है। वहीं, एक शौचालय में ताला लगा रहता है और पुरुषों का शौचालय गंदगी से भरा हुआ है। तहसील कर्मियों, वकीलों और अरायजनवीसों का कहना है कि शाम के समय एक गेट खुला रहने से शराबियों का जमावड़ा हो जाता है। इससे गंदगी फैलती है और कई बार टिन शेड से पंखों तक चोरी हो चुकी है। अराजक तत्वों की ओर से जेबकतरी और मोबाइल चोरी की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। पार्किंग की समुचित व्यवस्था न होने से तहसील परिसर में अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं व्यवस्था संभालने की कोशिश करती हैं, लेकिन लोग कार्यालय के पास ही वाहन खड़े कर देते हैं। ब्रिटिशकालीन जर्जर भवन में खुले बिजली के तार और खराब वायरिंग आग का खतरा पैदा कर रहे हैं। वाटर कूलर लगा होने के बावजूद साफ-सफाई के अभाव में उसका उपयोग कम ही हो रहा है। बरसात के समय पूरे परिसर में जलभराव हो जाता है। जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छर पनपते हैं और दुर्गंध के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पूर्व में कुमाऊं आयुक्त के दौरे के दौरान भी कई अनियमितताएं सामने आई थीं, जिसके बाद केवल एक सप्ताह तक व्यवस्थाएं सुधरीं। हालांकि अब परिसर फिर से अपनी पुरानी बदहाल स्थिति में पहुंच गया है।नो पार्किंग और जुर्माने की सूचना केवल दिखावे तक सीमितहल्द्वानी। तहसीलदार के कार्यालय की दीवार पर ‘नो पार्किंग’ की सूचना अंकित है, लेकिन इसके बावजूद यहां अक्सर वाहन खड़े नजर आते हैं। सूचना में 500 रुपये जुर्माने का उल्लेख है, फिर भी इसका पालन नहीं हो रहा। इतना ही नहीं, मुख्य कार्यालय के बीच खाली स्थान पर दोपहिया वाहन खचाखच भरे रहते हैं। वहीं नियमों का पालन कराने वाला भी कोई नजर नहीं आता है।मेन गेट पर नहीं लगाया जाता तालाहल्द्वानी। तहसील कार्यालय में बैठने वाले अरायजनवीसों और वकीलों का कहना है कि रात के समय अराजक तत्वों का बोलबाला रहता है। कई बार यहीं लोग टिन शेड के अंदर बैठकर शराब पीते हैं, तो कभी पंखे और कूलर तक चोरी हो जाते हैं। वहीं, दोपहर में भी गेट पर अराजक तत्वों का जमावड़ा रहता है, जिससे तहसील आने वाले लोगों के सामान और जेब पर भी हाथ साफ कर दिया जाता है।वीआईपी ड्यूटी में भेजे जाने को लेकर रोषहल्द्वानी। वकीलों का कहना है कि अक्सर पटवारियों सहित अन्य अधिकारियों को वीआईपी ड्यूटी में भेज दिया जाता है। इससे दूर-दराज से आने वाले लोगों को परेशानी होती है। कई लोग कागजों में रिपोर्ट आदि लगवाने के लिए चक्कर काटते रह जाते हैं। इससे काम प्रभावित होता है और लोगों की परेशानी बढ़ती है। उन्होंने कहा कि कार्य के दिन तय होने के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि लोगों का समय और पैसा बर्बाद न हो।खिड़की-दरवाजे टूटे, तारों का फैला मकड़जालहल्द्वानी। ब्रिटिशकालीन हेरिटेज भवन की देखरेख न होने से पूरी इमारत की हालत जर्जर हो चुकी है। खिड़कियां और दरवाजे टूटे पड़े हैं, जबकि बिजली के तार और ओएफसी केबल बेतरतीब तरीके से फैले हुए हैं। कई जगह बिजली के बोर्ड खुले हैं, जो आंधी-तूफान के दौरान बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं। वहीं परिसर में न तो बैठने की व्यवस्था है और न ही कोई बड़ी कैंटीन, जहां लोग धूप और बारिश से बच सकें।‘टोकन और सिंगल विंडो सिस्टम लागू हो’हल्द्वानी। वकीलों का कहना है कि खतौनी और अन्य कार्यों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को एक ही स्थान पर सभी जानकारी और फार्म उपलब्ध हो सकें। साथ ही टोकन व्यवस्था भी लागू की जाए, जिससे लोग बिना लंबी कतार में लगे निर्धारित समय पर अपने कार्य आसानी से करवा सकें।शौचालय केवल अधिकारियों तक सीमितहल्द्वानी। तहसील में कार्यरत महिला कर्मियों की सबसे बड़ी समस्या शौचालय की सुविधा का अभाव है। महिलाओं का कहना है कि पहले एक शौचालय का उपयोग किया जाता था, लेकिन अब उस पर केवल अधिकारियों के लिए सूचना अंकित कर दी गई है। जो शौचालय महिलाओं के लिए है, उसमें भी ताला लगा दिया गया है। ऐसे में उन्हें मजबूरन रोडवेज जाकर सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग करना पड़ता है और हर बार शुल्क देना पड़ता है।अवकाश के दिन काउंटर पर बाहरी लोगों का कब्जाहल्द्वानी। महिला अधिवक्ताओं का कहना है कि बाहरी लोगों का हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है। जिनके पास लाइसेंस नहीं होता, वे काउंटर खाली देखकर अपनी दुकान सजा लेते हैं। इससे लोगों के गलत प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं और उनसे मोटी रकम वसूली जा रही है। एक महिला अधिवक्ता ने बताया कि उनके साथ भी ऐसा ही मामला हुआ, जब अवकाश के बाद लौटने पर एक अंजान व्यक्ति गलत दस्तावेज दिखाकर उनसे बहस करने लगा। इसके बावजूद यह सिलसिला थम नहीं पाया है।पांच शिकायतेंमहिलाओं के लिए शौचालय नहीं, उपलब्ध शौचालय में ताला लटका हैसुरक्षा व्यवस्था कमजोर, चोरी और जेबकतरी की घटनाएं।बैठने और वेटिंग रूम की व्यवस्था का अभाव।अव्यवस्थित पार्किंग से जाम की स्थिति।काउंटर कम होने से घंटों लाइन में इंतजार।पांच सुझावटोकन सिस्टम लागू किया जाए।महिलाओं के लिए अलग शौचालय और वेटिंग रूम बने।अतिरिक्त काउंटर और स्टाफ की तैनाती हो।सीसीटीवी और सुरक्षा गार्ड लगाए जाएं।डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड और हेल्प डेस्क शुरू हो। पांच सुझावमहिलाओं के लिए अलग शौचालय और वेटिंग रूम बनाया जाए।टोकन सिस्टम लागू किया जाए।अतिरिक्त काउंटर और स्टाफ की तैनाती की जाए।सीसीटीवी और सुरक्षा गार्ड लगाए जाएं।डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड और हेल्प डेस्क शुरू की जाए।बोले लोगरोजाना सैकड़ों लोग आते हैं, लेकिन बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। महिलाओं के लिए शौचालय का अभाव बेहद गंभीर समस्या है। प्रशासन को जल्द मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।प्रकाश चंद्रऐतिहासिक तहसील होने के बावजूद यहां सुविधाएं बेहद खराब हैं। बरसात में पूरा परिसर जलभराव से भर जाता है। सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होने से चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं। तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।मो. शादाफवकीलों और आम जनता दोनों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। सिंगल विंडो सिस्टम लागू होना चाहिए। टोकन व्यवस्था से भीड़ कम की जा सकती है। प्रशासन को इस दिशा में गंभीरता दिखानी चाहिए।एडवोकेट गंगा प्रसादतहसील परिसर में पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। वाहनों की भीड़ से काम प्रभावित होता है। बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं। व्यवस्था सुधारना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।एडवोकेट विनोद जोशीमहिलाओं के लिए अलग शौचालय न होना चिंताजनक है। उपलब्ध शौचालय पर ताला लगा रहता है। इससे महिला कर्मियों और आगंतुकों को परेशानी होती है। तुरंत व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।निर्मला नैय्यरतहसील भवन की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। सफाई और शौचालय व्यवस्था भी पूरी तरह नदारद है। हमें हर बार सार्वजनिक शौचालयों में पैसे देने पड़ते हैं।एडवोकेट किरण तिवारीभीड़ बढ़ने के बावजूद सुविधाओं में सुधार नहीं हुआ है। लोगों को धूप और बारिश में खड़ा रहना पड़ता है। वेटिंग एरिया की व्यवस्था होनी चाहिए। जनता की समस्याओं का समाधान जरूरी है।रौनकरात में अराजक तत्वों का जमावड़ा रहता है। चोरी की घटनाएं भी सामने आई हैं। सुरक्षा गार्ड की तैनाती जरूरी है। तहसील परिसर को सुरक्षित बनाया जाए।एडवोकेट मोहन लालअक्सर अधिकारी वीआईपी ड्यूटी में भेज दिए जाते हैं। इससे दूर-दराज से आए लोगों को परेशानी होती है। वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए। कामकाज प्रभावित नहीं होना चाहिए।एडवोकेट फरगत खानजलभराव से परिसर में मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है। साफ-सफाई की व्यवस्था कमजोर है। बाहरी लोगों पर रोक लगनी चाहिए। जिनके पास लाइसेंस है, उन्हें ही अनुमति दी जानी चाहिए।पूजा आर्यतहसील में सिंगल विंडो सिस्टम होना चाहिए। लोगों का समय बर्बाद होता है। अधिक काउंटर खोले जाने चाहिए। व्यवस्था सुधारना जरूरी है।कृष्ण चंदनो पार्किंग के बावजूद वाहन खड़े किए जाते हैं। जुर्माने की व्यवस्था लागू नहीं होती। प्रबंधन की कमी साफ नजर आती है, सख्ती जरूरी है।एडवोकेट जेके पंतकैंटीन और बैठने की जगह का अभाव है। लोगों को घंटों खड़ा रहना पड़ता है। बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए।विनोद पंतमहिला कर्मियों को बाहर शौचालय जाना पड़ता है। हर बार शुल्क देना पड़ता है। यह स्थिति बेहद शर्मनाक है। महिलाओं के लिए सुविधा होनी चाहिए।मो. नईमअवकाश के दिन बाहरी लोग काउंटर संभाल लेते हैं। गलत कागज बनाए जाने की शिकायतें हैं। इस पर रोक लगनी चाहिए। प्रशासन को निगरानी बढ़ानी होगी।मो. मुख्तारतहसील परिसर में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। भीड़ के अनुसार व्यवस्थाएं नहीं हैं। जनता में नाराजगी बढ़ रही है। जल्द सुधार की आवश्यकता है।विजय गुणवंतबोले जिम्मेदार महिलाओं के लिए शौचालय की व्यवस्था तो है, लेकिन यदि वह बंद रहता है तो उसे खुलवाया जाएगा। साफ-सफाई नियमित रूप से हो रही है। पार्किंग की जगह कम होने के कारण परेशानी होती है। परिसर में वाहन खड़ा करने वालों के लिए जुर्माने का प्रावधान है। पेयजल की व्यवस्था भी दुरुस्त करवाई जाएगी।एसडीएम प्रमोद कुमार

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