कीड़े वाला खाना, 12 घंटे ड्यूटी पर कर्मचारियों की हड़ताल: हल्द्वानी में कंपनी के बाहर धरने पर डटे, पुलिस बल तैनात; 12 मांगें मानी गईं – Nainital News

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हल्द्वानी में बरेली रोड स्थित मोटाहल्दू में कंपनी गेट के बाहर प्रदर्शन करते कर्मचारी, इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा।

हल्द्वानी में मदरसन कंपनी के कर्मचारियों ने खाने में कीड़े मिलने, 8 घंटे की जगह 12 घंटे तक काम कराने और कम वेतन के आरोप लगाते हुए हड़ताल शुरू कर दी। करीब 500 महिला और पुरुष कर्मचारी ₹20,000 न्यूनतम वेतन और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर कंप

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बरेली रोड स्थित मोटाहल्दू में कंपनी गेट के बाहर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने बसों के खराब मेंटेनेंस, ‘नो ब्रेक सिस्टम’ और अमानवीय व्यवहार जैसे आरोप लगाए हैं। महिला कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें पानी पीने और वॉशरूम जाने तक के लिए रोका जाता है, वहीं कई बार 8 घंटे की शिफ्ट के बजाय 12 घंटे तक काम कराया जाता है। दूसरी ओर, कंपनी प्रबंधन का दावा है कि 17 में से 12 मांगें पहले ही मान ली गई हैं और ओवरटाइम का भुगतान नियम के अनुसार डबल रेट से किया जाता है। प्रशासन का कहना है कि अधिकतर मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और जल्द ही स्थिति सामान्य हो सकती है। वहीं, कर्मचारियों के आक्रोश को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात रहा।

कर्मचारियों के प्रदर्शन से जुड़ी PHOTOS…

मदरसन कंपनी के बाहर मांगों को लेकर आवाज उठाते कर्मचारी।

मदरसन कंपनी के बाहर मांगों को लेकर आवाज उठाते कर्मचारी।

मांगों को लेकर भारी संख्या में कर्मचारी धरने पर डटे।

मांगों को लेकर भारी संख्या में कर्मचारी धरने पर डटे।

कर्मचारियों के आक्रोश को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात रहा।

कर्मचारियों के आक्रोश को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात रहा।

अब जानिए क्या हैं मांगें…

1. आर्थिक शोषण और मनमानी हड़ताल पर बैठे करीब 500 महिला और पुरुष कर्मचारियों ने कंपनी प्रबंधन पर आर्थिक शोषण और मनमानी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि काम ज्यादा लिया जाता है, लेकिन वेतन और सुविधाएं उसके अनुरूप नहीं दी जा रहीं।

2. अमानवीय व्यवहार, पानी-टॉयलेट तक रोक महिला कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि काम के दौरान उन्हें पानी पीने या वॉशरूम जाने तक के लिए टोक दिया जाता है। साथ ही इंजीनियरों और प्रबंधन के अधिकारियों द्वारा अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे उन्होंने अमानवीय व्यवहार बताया।

3. निकाले गए कर्मचारियों की वापसी प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में हाल ही में निकाले गए साथियों को तुरंत काम पर वापस लेना शामिल है। उनका कहना है कि बिना ठोस कारण कर्मचारियों को हटाया जा रहा है, जिससे असंतोष बढ़ा है।

4. ओवरटाइम का पूरा भुगतान करें कर्मचारियों का आरोप है कि उनसे तय समय से कहीं ज्यादा काम कराया जाता है, लेकिन उसके बदले उचित ओवरटाइम या पारिश्रमिक नहीं दिया जाता। यही मुद्दा आंदोलन की बड़ी वजह बन गया है।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों के साथ नोकझोंक भी हुई।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों के साथ नोकझोंक भी हुई।

प्रदर्शनकारियों ने सुनाई आपबीती…

‘खाने में कीड़े, 8 की जगह 12 घंटे काम’

प्रदर्शन में शामिल महिला कर्मचारियों ने कंपनी की कार्यशैली और सुविधाओं को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि उन्हें न सिर्फ कम वेतन मिलता है, बल्कि काम के दौरान बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दी जा रहीं।

एक महिला कर्मचारी ने कहा,

“खाने में दिक्कत है, खाना अच्छा नहीं मिलता। कभी चावल कच्चे होते हैं तो कभी उसमें कीड़े-मकोड़े निकलते हैं।”

इस पर पीछे से अन्य महिलाओं ने भी आवाज उठाते हुए कहा, “हां, खाने में कीड़े मिलते हैं।”

महिला कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें तय समय से ज्यादा काम कराया जाता है। एक कर्मचारी ने बताया- “ड्यूटी 8 घंटे की होती है, लेकिन हमसे 8.5 घंटे काम कराया जाता है। 6 से 2 की शिफ्ट में भी 15 मिनट एक्स्ट्रा काम लेते हैं। अगर हम लेट पंच करें तो पैसे काट लिए जाते हैं।

कंपनी हमारी स्थिति नहीं समझती

वेतन को लेकर भी कर्मचारियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि बेसिक सैलरी ₹12,500 है, लेकिन कटौती के बाद हाथ में सिर्फ ₹10,000-11,000 ही मिलते हैं। कर्मचारियों ने कहा- “हममें से ज्यादातर लोग किराए पर रहते हैं, घर इसी सैलरी से चलता है, लेकिन कंपनी हमारी स्थिति नहीं समझती।

महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार उनसे 8 की जगह 12 घंटे तक काम कराया जाता है और ओवरटाइम का भुगतान नहीं मिलता। उन्होंने बताया, “कभी-कभी बिना ओटी के जबरदस्ती रोक लिया जाता है। टारगेट पूरा न होने पर हमारा टी-टाइम और लंच तक बंद कर दिया जाता है।

साथ ही, महिला कर्मचारियों ने स्वास्थ्य और छुट्टी को लेकर भी परेशानी जताई। उन्होंने कहा, हमें मंथली प्रॉब्लम होती है, लेकिन छुट्टी नहीं दी जाती। जबरदस्ती काम कराया जाता है।

कर्मचारियों ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा अप्रैल से वेतन बढ़ाने के नियम के बावजूद अब तक बढ़ोतरी नहीं की गई है। हम कोई गलत मांग नहीं कर रहे, हम अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।

कंपनी का पक्ष, 17 में से 12 मांगें मान लीं

मदरसन फैक्ट्री के एचआर सुभाष तिवारी ने कर्मचारियों के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रबंधन लगातार संवाद के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया, “कर्मचारियों की ओर से 17 सूत्रीय मांग पत्र दिया गया था, जिसमें से 12 मांगों को हम पहले ही मान चुके हैं।”

वेतन बढ़ोतरी के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला सरकार के स्तर पर लंबित है। “वेजेस से जुड़ा मामला सरकार के एंड पर है। जैसे ही इसका जीओ (GO) या नोटिफिकेशन जारी होगा, हम उसे तुरंत लागू कर देंगे,” तिवारी ने कहा।

ओवरटाइम और काम के घंटों को लेकर लगे आरोपों पर भी उन्होंने सफाई दी। “अगर किसी दिन जरूरत पड़ती है और कर्मचारियों को 8 घंटे से ज्यादा रोका जाता है, तो उसका डबल पेमेंट दिया जाता है। अगर कोई कर्मचारी यह कहता है कि उसे डबल ओवरटाइम नहीं मिला, तो वह प्रूफ दिखाए, हम तुरंत कार्रवाई करेंगे,” उन्होंने जोड़ा।

कंपनी प्रबंधन का कहना है कि कर्मचारियों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और बातचीत के जरिए जल्द समाधान निकालने का प्रयास जारी है।

उप श्रमायुक्त ने कहा, अधिकांश मांगों पर सहमति बनी

उप श्रमायुक्त कमल जोशी ने पूरे मामले पर प्रशासन का पक्ष रखते हुए बताया कि मदरसन सुमी कारखाने के संविदा और ठेका श्रमिक सुबह से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की समस्याएं मुख्य रूप से वेतन, कार्य परिस्थितियों और बस/कन्वेंस व्यवस्था से जुड़ी हुई हैं।

उन्होंने बताया, “प्रबंधन और श्रमिकों के बीच हमारी मध्यस्थता में वार्ता कराई गई। इसमें एसडीएम, एसपी और सीओ भी मौजूद रहे। 12 मांगों को प्रबंधन द्वारा मान लिया गया है, जबकि अन्य मांगें नीतिगत हैं, जिन पर समय लिया गया है।”

जोशी के अनुसार, जिन दो मांगों पर फैसला लंबित है, उनमें वेतन वृद्धि का मुद्दा, जिस पर राज्य सरकार को निर्णय लेना है, और 5 व 10 साल की सेवा के आधार पर सैलरी बढ़ोतरी, जो उच्च प्रबंधन स्तर पर तय होगी, शामिल हैं।

काम के घंटे और वेतन को लेकर लगे आरोपों पर उन्होंने कहा, “श्रमिकों ने 12 घंटे ड्यूटी और कम भुगतान की बात कही थी, लेकिन जांच और स्पष्टीकरण के बाद पाया गया कि मानकों के अनुसार भुगतान किया जा रहा है। 8 घंटे से अधिक काम पर डबल रेट से ओवरटाइम दिया जाता है।”

उन्होंने यह भी बताया कि मदरसन एक मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) है, जहां ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए वायरिंग हार्नेस जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं।

प्रशासन का कहना है कि अधिकांश मांगों पर सहमति बनने के बाद श्रमिक अब काम पर लौटने को तैयार हैं।

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