मवेशी खोजने जंगल गए वन गुर्जर की मिली लाश, भालू के हमले की आशंका

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मवेशी खोजने जंगल गए वन गुर्जर की मिली लाश, भालू के हमले की आशंका

तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी के किशनपुर वन क्षेत्र में मिली वन गुर्जर की लाश, शरीर पर मिले नोंचने और खरोंचने के गहरे निशान

GUJJAR DIES BEAR ATTACK HALDWANI

वन गुर्जर के परिजनों से मिलते वनाधिकारी

(

फोटो सोर्स- Forest Department

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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : April 26, 2026 at 6:57 PM IST

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हल्द्वानी: नैनीताल जिले के हल्द्वानी के तराई पूर्वी वन प्रभाग के किशनपुर रेंज में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां जंगल में मवेशी खोजने गए वन गुर्जर का शव संदिग्ध हालत में मिला. शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिलने से भालू के हमले की आशंका जताई जा रही है. वहीं, वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है और परिजनों को मुआवजे का आश्वासन दिया गया है.

जानकारी के मुताबिक, रैखाल खत्ता निवासी वन गुर्जर मोहम्मद आरिफ अपने मवेशियों की तलाश में 25 अप्रैल को दोपहर करीब 2 बजे जंगल की ओर गया था, लेकिन देर रात तक घर वापस नहीं लौटा. चिंतित परिजनों ने इसकी सूचना वन विभाग की नजदीकी चौकी में दी. सूचना मिलते ही वन क्षेत्राधिकारी घनानंद चनियाल के नेतृत्व में वन विभाग की टीम, स्थानीय गश्ती दल और परिजनों के साथ मिलकर सघन सर्च अभियान चलाया गया.

बॉडी पर नोंचने और खरोंचने के गहरे निशान मिले: काफी खोजबीन के बाद रुद्रपुर बीट के प्लॉट संख्या 5 और 9 के बीच स्थित फायर लाइन में मोहम्मद आरिफ का शव बरामद हुआ. मौके पर शव की स्थिति बेहद गंभीर थी. कपड़े फटे हुए थे और शरीर पर गहरे नोंचने और खरोंचने के निशान पाए गए. प्रथम दृष्टया मामला भालू के हमले का प्रतीत हो रहा है. वन विभाग की टीम ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई के लिए रैखाल खत्ता पहुंचाया.

26 अप्रैल को प्रभागीय वनाधिकारी, उप प्रभागीय वनाधिकारी और अन्य अधिकारियों ने मृतक के घर पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाया और जल्द मुआवजा देने का आश्वासन दिया. घटना के बाद वन विभाग ने इलाके में भालू की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप लगाने, पिंजरे की व्यवस्था करने और ड्रोन के जरिए सर्च ऑपरेशन चलाने के निर्देश दिए हैं.

संभवतः व्यक्ति की मौत भालू के हमले से हुई है. मामले की जांच की जा रही है. क्षेत्र में गश्त करने वाली टीम को बढ़ाया गया है. मामले में अग्रिम कार्रवाई की जा रही है. साथ ही ग्रामीणों और खत्तेवासियों को जंगल में अकेले न जाने की सख्त हिदायत दी गई है. ताकि, मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोका जा सके.“- अनिल जोशी, एसडीओ

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