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हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले के बीच पुनर्वास की प्रक्रिया एक अहम चरण में पहुंच गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत यहां करीब 6954 लोगों ने आवेदन कर दिए हैं और जिला प्रशासन ने अब इन फॉर्म्स की जांच (स्क्रूटनी) शुरू कर दी है।

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आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद इलाके में असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है। बड़ी संख्या में लोग यह जानना चाहते हैं कि उन्हें नया मकान कहां मिलेगा, उसका आकार कितना होगा और इसके लिए उन्हें कितनी रकम देनी होगी। इन सवालों का स्पष्ट जवाब अभी तक नहीं मिलने से लोग अभी भी अनसेफ महसूस कर रहे हैं।

बनभूलपुरा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में, जहां हजारों परिवार रोजमर्रा की मजदूरी और छोटे कारोबार पर निर्भर हैं, पुनर्वास सिर्फ मकान का मुद्दा नहीं बल्कि रोजगार, बच्चों की पढ़ाई और पूरे सामाजिक ढांचे से जुड़ा सवाल बन गया है। यही वजह है कि आवेदन जमा होने के बाद भी लोगों की चिंता कम नहीं हुई, बल्कि नए सवाल खड़े हो गए हैं।

कोर्ट के आदेश के बाज लोगों से पीएम आवास के आवेदन मांगे गए थे, अब इन्हें प्राप्त आवेदनों का सत्यापन किया जाएगा।

कोर्ट के आदेश के बाज लोगों से पीएम आवास के आवेदन मांगे गए थे, अब इन्हें प्राप्त आवेदनों का सत्यापन किया जाएगा।

आवेदन प्रक्रिया पूरी, अब शुरू हुई स्क्रूटनी

रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बनभूलपुरा क्षेत्र में पुनर्वास के लिए कैंप लगाए थे। 21 मार्च से 1 अप्रैल तक छह स्थानों पर आवेदन लिए गए, जहां हजारों लोग पहुंचे और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फॉर्म भरे।

इस पूरी प्रक्रिया में कुल 6954 आवेदन प्राप्त हुए हैं। अब प्रशासन इन आवेदनों की जांच कर रहा है। नगर आयुक्त परितोष वर्मा के अनुसार, स्क्रूटनी के लिए अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है और सत्यापन का काम शुरू हो चुका है।

पार्षद बोले- कहां मिलेगा मकान, कुछ भी स्पष्ट नहीं

गफूर बस्ती के पार्षद सलीम सैफी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सर्वे और आवेदन तो करा लिए गए, लेकिन लोगों के सबसे बड़े सवालों का जवाब अभी तक नहीं दिया गया है।

उन्होंने कहा कि योजना के तहत लोगों को यह नहीं बताया गया कि उन्हें मकान कहां मिलेगा, कितनी दूरी पर मिलेगा और उसका आकार क्या होगा। बनभूलपुरा जैसे क्षेत्र में स्कूल, धार्मिक स्थल और रोज़गार के साधन मौजूद हैं, ऐसे में अचानक विस्थापन लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

‘पूरे इलाके में सस्पेंस, रोजगार और पढ़ाई पर असर का डर’

स्थानीय निवासी मोहम्मद जावेद के मुताबिक, लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार आवेदन तो कर दिए हैं, लेकिन उन्हें अभी तक यह नहीं बताया गया कि उन्हें मकान कहां मिलेगा और इसके लिए कितनी राशि देनी होगी।

उन्होंने कहा कि इस अनिश्चितता के कारण पूरे इलाके में सस्पेंस बना हुआ है। ज्यादातर लोग दिहाड़ी मजदूर, राजमिस्त्री, बढ़ई या छोटे कारोबारी हैं, जिनका काम हल्द्वानी शहर से जुड़ा हुआ है।

कितने लोग प्रभावित, क्या है पूरा दायरा

बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण क्षेत्र करीब 30 हेक्टेयर में फैला हुआ है। सरकारी सर्वे के अनुसार इस जमीन पर करीब 5365 परिवार काबिज हैं, जबकि कुल मिलाकर लगभग 50 हजार लोग इस पूरे मामले से प्रभावित हो सकते हैं।

हालांकि आवेदन करने वालों की संख्या 6954 तक पहुंच गई है, जो यह दिखाती है कि कई परिवार पुनर्वास योजना का लाभ लेना चाहते हैं। अब प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि पात्र परिवारों की सही पहचान कर उन्हें योजना के दायरे में लाया जाए।

PM आवास योजना में क्या है प्रावधान?

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इस योजना के तहत लगभग 9 लाख रुपये तक के आवास का प्रावधान होता है।

इसमें केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मिलाकर करीब 4.5 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है, जबकि शेष राशि लाभार्थी को वहन करनी होती है। यानी एक अनुमान के मुताबिक लाभार्थी को करीब 4.5 से 4.75 लाख रुपये तक का योगदान देना पड़ सकता है।

यही वह बिंदु है, जिसको लेकर बनभूलपुरा के लोगों में सबसे ज्यादा भ्रम और चिंता है। लोगों को यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें कितनी राशि देनी होगी, क्या यह एकमुश्त होगी या किस्तों में देनी होगी।

दावा किया जाता है कि बनभूलपुरा में लगभग 90 प्रतिशत लोग मजदूरी करके अपना जीवन व्यापन करते हैं।-बस्ती की फाइल फोटो

दावा किया जाता है कि बनभूलपुरा में लगभग 90 प्रतिशत लोग मजदूरी करके अपना जीवन व्यापन करते हैं।-बस्ती की फाइल फोटो

कोर्ट की निगरानी में चल रही प्रक्रिया

पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रहा है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि प्रभावित लोगों को बिना पुनर्वास के बेदखल नहीं किया जा सकता और उन्हें योजना के तहत आवेदन का अवसर दिया जाना चाहिए।

इसी क्रम में आवेदन प्रक्रिया पूरी की गई और अब प्रशासन को पात्रता जांच कर रिपोर्ट तैयार करनी है। इस मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को निर्धारित है, जिसमें पुनर्वास प्रक्रिया की प्रगति पर भी चर्चा होगी।

अब तक मामले में क्या-क्या हुआ…

  • 2007: बनभूलपुरा और गफूर बस्ती क्षेत्र में रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर हाईकोर्ट का आदेश आया। प्रशासन ने करीब 0.59 एकड़ जमीन अतिक्रमण मुक्त कराई।
  • 2013: गौला नदी में अवैध खनन और पुल क्षति से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान रेलवे भूमि अतिक्रमण का मुद्दा फिर सामने आया और यह विवाद दोबारा चर्चा में आया।
  • 9 नवंबर 2016: हाईकोर्ट ने रेलवे को 10 हफ्तों के भीतर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।
  • 10 जनवरी 2017: राज्य सरकार और अतिक्रमणकारियों द्वारा जमीन को नजूल भूमि बताने का दावा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
  • 2017: मामला पहली बार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। रेलवे को बेदखली अधिनियम 1971 के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर अमल नहीं हो पाया।
  • 21 मार्च 2022: नई जनहित याचिका में कहा गया कि रेलवे अपनी भूमि से अतिक्रमण हटाने में विफल रहा है।
  • 18 मई 2022: कोर्ट ने प्रभावित लोगों से अपने दावे प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन वैध स्वामित्व के पर्याप्त दस्तावेज सामने नहीं आ सके।
  • 20 दिसंबर 2022: हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए, जिससे बड़े पैमाने पर बेदखली की आशंका बनी।
  • 5 जनवरी 2023: सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि 50 हजार लोगों को एक साथ बेघर नहीं किया जा सकता और पुनर्वास योजना जरूरी है।
  • 8 फरवरी 2024: अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में हिंसा भड़की, जिसमें कई लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए। इसके बाद क्षेत्र को संवेदनशील घोषित किया गया।
  • 24 फरवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्वास प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। कहा गया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के तहत पात्र लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना में आवेदन का मौका दिया जाए।
  • 21 मार्च – 1 अप्रैल 2026: जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बनभूलपुरा में 6 स्थानों पर कैंप लगाकर प्रधानमंत्री आवास योजना के फॉर्म भरवाए।
  • 1 अप्रैल 2026 तक: कुल 6954 लोगों ने आवेदन जमा किए, जो पुनर्वास प्रक्रिया का पहला बड़ा चरण माना जा रहा है।
  • 7 अप्रैल 2026: नगर निगम और प्रशासन ने आवेदन पत्रों की स्क्रूटनी के लिए अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया और जांच प्रक्रिया शुरू की।

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